नियमावली — PMUMS कर्मचारी कल्याण कोष
महत्वपूर्ण नियम (सदस्यता एवं सहयोग हेतु अनिवार्य नियमावली)
यह नियमावली कर्मचारी कल्याण कोष से जुड़े प्रत्येक सदस्य पर समान रूप से लागू होगी । इसका उद्देश्य योजना की पारदर्शिता, अनुशासन, आपसी विश्वास, एकजुटता एवं मानवीय सहयोग की भावना को सुदृढ़ बनाए रखना हैं ।
1. सदस्यता की पात्रता
कर्मचारी कल्याण कोष योजना की सदस्यता केवल मध्यप्रदेश राज्य के शिक्षा विभाग एवं जनजातीय/आदिम जाति कल्याण विभाग के शासकीय कर्मचारियों के लिए मान्य होगी।
प्रारम्भ में यह योजना समस्त विभागों के लिए लागू की गई थी, किंतु अगस्त 2025 से इसे केवल शिक्षा विभाग एवं जनजातीय कार्य विभाग तक सीमित किया गया है।
अगस्त 2025 से पूर्व अन्य विभागों के जिन कर्मचारियों ने सदस्यता ग्रहण की थी तथा जो योजना के नियमानुसार नियमित सहयोग करते आ रहे हैं, वे योजना में पात्र बने रहेंगे।
नवीन एवं पूर्व संवर्ग के अधिकारी, शिक्षक तथा गैर-शैक्षणिक कर्मचारी (लिपिक, बाबू, चपरासी आदि) सभी सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं।
योजना की सदस्यता पूर्णतः निःशुल्क रहेगी।
सेवा निवृत्त कर्मचारी योजना में शामिल नहीं होंगे। केवल सेवा अवधि के दौरान ही सदस्यता मान्य रहेगी तथा सेवा निवृत्ति के पश्चात सदस्यता स्वतः समाप्त मानी जाएगी।
2. योजना का उद्देश्य
इस योजना का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि शासकीय कर्मचारियों/शिक्षकों के बीच आपसी विश्वास, एकजुटता एवं मानवीय सहयोग की मजबूत श्रृंखला स्थापित करना है।
किसी सदस्य/शिक्षक की आकस्मिक एवं दुःखद मृत्यु होने की स्थिति में उसके नामिनी के बैंक खाते में निर्धारित सहयोग राशि जमा करना सभी सक्रिय सदस्यों के लिए अनिवार्य होगा।
यह सहयोग लाभ अर्जन के उद्देश्य से नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व, पारस्परिक सहयोग एवं इस भावना से किया जाएगा कि — “एक सदस्य की सुरक्षा, सभी की जिम्मेदारी” — यही इस योजना की मूल प्रेरणा है।
3. योजना का प्रारम्भ एवं सहयोग राशि
कर्मचारी कल्याण कोष योजना का प्रारम्भ ₹2,00,000 (दो लाख रुपये) सहयोग राशि से किया गया है।
सदस्यों की संख्या में वृद्धि होने के साथ-साथ सहयोग राशि में भी समय-समय पर वृद्धि की जाती रहेगी।
यदि एक ही माह में एक से अधिक सदस्य/शिक्षक का निधन होता है, तो सहयोग हेतु अपील की वरिष्ठता मृत्यु दिनांक के आधार पर निर्धारित की जाएगी तथा उसी क्रम में अपील जारी होगी। (यह संशोधित नियम मान्य होगा।)
4. सहयोग प्रक्रिया (अनिवार्य नियम)
किसी सदस्य/शिक्षक की आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में उसके नामित (Nominee) के बैंक खाते में निर्धारित सहयोग राशि जमा करना सभी सक्रिय सदस्यों के लिए अनिवार्य होगा।
यह सहयोग किसी लाभ या मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना एवं सामाजिक जिम्मेदारी के तहत किया जाएगा।
5. सहयोग (Contribution) संबंधी दिशा-निर्देश
यदि किसी सदस्य द्वारा सहयोग राशि जमा की जाती है किंतु रसीद / UTR / स्क्रीनशॉट अपलोड नहीं हो पाता, तो सहयोग निम्न शर्तों पर ही मान्य होगा —
- सहयोग संबंधित सदस्य के स्वयं के बैंकिंग ऐप (UPI/नेट बैंकिंग/मोबाइल बैंकिंग) से किया गया हो।
- यदि सदस्य स्वयं बैंकिंग ऐप उपयोग में नहीं लाता, तो केवल पति/पत्नी/पुत्र/पुत्री के बैंकिंग ऐप से किया गया सहयोग मान्य होगा।
- किसी तीसरे व्यक्ति, मित्र या साथी के बैंकिंग ऐप से किया गया सहयोग अमान्य होगा।
- किसी भी प्रकार की भ्रामक, फर्जी या अनुचित प्रवृत्ति पाए जाने पर सहयोग निरस्त किया जा सकता है।
6. लॉकिंग पीरियड (Locking Period) संबंधी नियम
योजना के अंतर्गत लॉकिंग पीरियड अनिवार्य रहेगा —
- 15 फरवरी 2026 तक पंजीकृत सदस्यों के लिए लॉकिंग पीरियड – 3 माह
- 16 फरवरी 2026 से पंजीकृत सदस्यों के लिए लॉकिंग पीरियड – 6 माह
नियम:
- सदस्यता दिनांक से लॉकिंग पीरियड पूर्ण होने के पश्चात ही नामिनी हेतु सहयोग अपील की जाएगी।
- लॉकिंग पीरियड पूर्ण न होने की स्थिति में किसी भी प्रकार की सहयोग अपील नहीं की जाएगी।
- यह नियम योजना के दुरुपयोग को रोकने हेतु अनिवार्य है।
7. सहयोग चूक (Missed Contribution) एवं 90% सहभागिता नियम
(क) पारंपरिक चूक नियम
- यदि कोई सदस्य लगातार तीन सहयोग पूर्ण कर चुका है और उसके पश्चात किसी कारणवश अगला सहयोग नहीं कर पाता तथा उसी अंतराल में उसकी मृत्यु हो जाती है, तो भी उसके नामिनी हेतु सहयोग अपील की जाएगी।
- यदि कोई सदस्य लगातार दो सहयोग नहीं करता, तो उसकी सदस्यता अमान्य मानी जाएगी।
(ख) 90% सहभागिता नियम
- प्रत्येक सदस्य को अपनी पंजीकरण तिथि के पश्चात होने वाले कुल सहयोगों में से न्यूनतम 90% सहयोग अनिवार्य रूप से करना होगा।
- 90% से कम सहयोग करने पर नामिनी लाभ हेतु अपात्र माना जाएगा।
- इस विषय में कोई अपील स्वीकार्य नहीं होगी।
- उदाहरण: 10 सहयोग में कम से कम 9 सहयोग अनिवार्य।
8. पुनः सदस्यता के नियम
यदि कोई सदस्य लगातार दो या अधिक सहयोग नहीं करने के कारण अपात्र हो जाता है और पुनः योजना में शामिल होना चाहता है, तो —
- उसे पुनः लगातार तीन सहयोग पूर्ण करना अनिवार्य होगा।
- तीन सहयोग पूर्ण होने के पश्चात ही सदस्यता पुनः मान्य होगी।
- पुनः सदस्यता के बाद लॉकिंग पीरियड पूर्ण होने से पूर्व मृत्यु की स्थिति में नामिनी हेतु कोई सहयोग अपील नहीं की जाएगी।
9. सहयोग तिथि संबंधी अनिवार्य निर्देश
संस्था द्वारा निर्धारित तिथि के पश्चात किया गया सहयोग मान्य नहीं होगा, भले ही राशि सीधे नोमिनी के खाते में जमा की गई हो। अतः सभी सदस्यों को केवल घोषित समय-सीमा के भीतर सहयोग जमा करना अनिवार्य होगा।
10. माता-पिता सहयोग संबंधी संवेदनशील प्रावधान
दिवंगत सदस्य के परिवार — अर्थात् उसकी पत्नी/पुत्र/पुत्री अथवा सदस्य द्वारा नामित (नोमिनी) व्यक्ति — को सहयोग प्रदान करते समय यह परीक्षण किया जाएगा कि दिवंगत सदस्य के माता-पिता जीवित हैं अथवा नहीं। यदि माता-पिता जीवित हों तथा उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो और उनकी आय का कोई स्थायी स्रोत उपलब्ध न हो, तो ऐसी परिस्थिति में यदि संस्थापक मंडल को यह उचित प्रतीत होता है कि माता-पिता को सहयोग प्रदान किया जाना चाहिए, तो संस्थापक मंडल दिवंगत सदस्य के नोमिनी के साथ-साथ माता-पिता के सहयोग हेतु भी अपील जारी कर सकेगा। यह प्रावधान निम्न परिस्थितियों में भी लागू होगा — यदि दिवंगत सदस्य अपने माता-पिता से पृथक निवास कर रहा हो, अथवा यदि उसने अपने माता-पिता को नोमिनी के रूप में नामित न किया हो। यह योजना संवेदनशीलता, पारिवारिक उत्तरदायित्व एवं मानवीय मूल्यों का उदाहरण है। अतः संघ की संवेदनाएँ एवं सहयोग की भावना दिवंगत सदस्य के माता-पिता के साथ भी सदैव जुड़ी रहेंगी।
11. अपात्रता एवं अनुशासन संबंधी नियम
- फर्जी स्क्रीनशॉट या भ्रामक जानकारी देना।
- दिवंगत सदस्य के नामिनी को सहयोग न करना।
- किसी अन्य समान संगठन/टीम का प्रचार करना या पदाधिकारी बनना।
- पदाधिकारियों के साथ अभद्र व्यवहार, डराना-धमकाना या अनुचित आचरण।
- लॉकिंग पीरियड पूर्ण न होने की स्थिति में सहयोग अपील स्वीकार नहीं की जाएगी।
- ऐसे सदस्य पूर्व सहयोग के आधार पर किसी भी लाभ का दावा नहीं कर सकेंगे।
12. आत्महत्या, अपराध एवं विवादित प्रकरण
सामान्यतः आत्महत्या अथवा किसी भी विवादित परिस्थिति में सहयोग अपील नहीं की जाएगी। हत्या एवं बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों में मुख्य आरोपी को योजना का कोई लाभ नहीं दिया जाएगा।
संशोधित मानवीय नियम: ऐसे मामलों को संबंधित जिले के सदस्यों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा तथा परिस्थितियों के आधार पर जिले द्वारा लिया गया निर्णय अंतिम एवं मान्य होगा।
13. जिलों की भूमिका
विवादित परिस्थितियों, नामिनी विवाद अथवा विशेष मामलों में उसी जिले के सदस्यों से सहयोग लिया जाएगा, जिस जिले का सदस्य दिवंगत हुआ है। जिले के सदस्य परिजनों को अनुकंपा नियुक्ति, अन्य प्रशासनिक दावे, मार्गदर्शन एवं नैतिक सहयोग प्रदान करेंगे।
14. शिक्षक नेतृत्व का महत्व
शिक्षक राष्ट्र निर्माता एवं समाज के मार्गदर्शक होते हैं। सेवा, पारदर्शिता एवं संवेदनशील नेतृत्व के कारण यह योजना शिक्षक नेतृत्व में संचालित की जाती है, जिससे संगठन में विश्वास एवं अनुशासन बना रहता है।
15. आधिकारिक सूचना माध्यम
सभी आधिकारिक सूचनाएँ केवल संस्था की आधिकारिक वेबसाइट, WhatsApp चैनल, YouTube चैनल, Telegram चैनल के माध्यम से जारी की जाएँगी। सभी सदस्यों को इन माध्यमों को Follow/Subscribe करना अपेक्षित होगा।
16. अंतिम निर्देश
सभी सदस्यों से यह अपेक्षा की जाती है कि कर्मचारी कल्याण कोष के किसी भी सदस्य के दिवंगत होने की स्थिति में उसके नामिनी का सहयोग नियमों के अनुरूप अनिवार्य रूप से किया जाए।
यह योजना केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना, सामाजिक एकजुटता, अनुशासन और पारस्परिक विश्वास का प्रतीक है।